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ED और वित्त मंत्रालय में मच सकता है घमासान ...

ED और वित्त मंत्रालय में मच सकता है घमासान

एयरसेल-मैक्सिस और 2जी घोटाले केस में पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम को आरोपी बनाने वाले प्रवर्तन निदेशालय के बड़े अधिकारी राजेश्वर सिंह खुद मुसीबतों में घिर गए हैं। 

केंद्र सरकार ने सिंह के खिलाफ अवैध कमाई के आरोपों की जांच शुरू की है। सिंह पर लगे आरोपों की जांच राजस्व विभाग के अधिकारी कर रहे हैं। इसी साल 27 जून को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को राजेश्वर सिंह के खिलाफ जांच करने की इजाजत दी थी। सिंह को सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा का नजदीकी माना जाता है, जिन्हें जबरन छुट्टी पर भेजा गया है। यह भी संयोग की बात है कि ईडी के संयुक्त निदेशक राजेश्वर सिंह के खिलाफ जांच तब शुरू हुई, जब आलोक वर्मा ने केंद्र सरकार के फैसले का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को भी आलोक वर्मा की तरह जबरन छुट्टी पर भेजा गया है। इन दोनों अधिकारियों के बीच घुसखोरी को लेकर जंग चल रही थी। केंद्र सरकार ने मामले की जांच सीवीसी को सौंपी है। तब तक  एम नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक बनाया है। इस बीच मौजूदा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के प्रमुख और आईपीएस अफसर करनाल सिंह की सेवा शुक्रवार (26 अक्टूबर) को समाप्त हो गया।

सूत्रों के मुताबिक उन्हें इस पद पर सेवा विस्तार मिलने की संभावना नहीं है। बता दें कि राजेश्वर सिंह के खिलाफ रजनीश कपूर ने सुप्रीम कोर्ट में आय से अधिक संपत्ति का आरोप लगाया था। इस याचिका के बाद राजेश्वर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में  एक आपराधिक अवमानना याचिका लगाई थी। हालांकि, इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) से कई साल पहले ही क्लीनचिट मिल चुकी थी। बावजूद इसके सुप्रीम कोर्ट ने सिंह के खिलाफ जांच करने के निर्देश दिए थे।

उधर, भाजपा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा है कि अगर ईडी से राजेश्वर सिंह की विदाई हो जाती है तो एयरसेल-मैक्सिस मामले समेत वह पी चिदंबरम के खिलाफ अपनी सभी याचिका वापस ले लेंगे। स्वामी ने कहा, आज की स्थिति में अगर राजेश्वर सिंह को ईडी से हटा दिया जाता है तो मैं यह समझूंगा कि चिदंबरम को बचाने की कोशिश अब खत्म हो गई है।उन्होंने कहा, हमारी पार्टी में भी चिदंबरम के कई शुभचिंतक हैं जो उन्हें बचाना चाहते हैं।

दो बड़े अफसरों में ठन चुकी है रार

इस साल 11 जून की बात है. जब टू जी घोटाले की जांच कर रहे ईडी(ED) के ज्वाइंट डायरेक्टर राजेश्वर सिंह (Rajeshwar Singh) ने देश के वित्तसचिव हसमुख अधिया (Hasmukh Adhia) के खिलाफ ऐसी चिट्ठी लिख दी, जिसने 'लुटियन्स जोन' में खलबली मचा दी. राजेश्वर सिंह ने आठ पन्नों की इस चिट्ठी में हसमुख अधिया के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए. उन्हें स्कैममास्टर्स यानी घोटालेबाजों के साथ खड़ा होने वाला करार देते हुई कई तीखे सवाल किए थे. राजेश्वर सिंह ने कहा-मंत्रालय के हर पैमाने पर काबिल पाए जाने के बावजूद मेरे प्रमोशन पर विचार नहीं किया गया. क्या घोटालेबाजों और उनके सहयोगियों का पक्ष लेकर उनसे बैर पाल लिया है.' इसमें उन्होंने उनकी प्रोन्नति की अनदेखी करने, 'राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने' और 'अहंकार के कारण बदला लेने' का मुद्दा उठाया .

बहरहाल, शुरुआत में इस लेटर की किसी को खबर नहीं हुई. इस बीच राजेश्वर सिंह के खिलाफ दुबई के एक संदिग्घ व्यक्ति से बातचीत करने और अन्य तरह की शिकायत का मामला सुप्रीम कोर्ट में जाता है. राजेश्वर अपने खिलाफ शिकायतों को झूठा करार देते हैं, मगर सुप्रीम कोर्ट उनके खिलाफ जांच से किसी तरह की छूट नहीं देता. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राजेश्वर सिंह का 11 जून को ईडी के डायरेक्टर करनैल सिंह और रेवेन्यू सेक्रेटरी को लिखा सनसनीखेज पत्र अचानक सरकारी फाइलों से बाहर आ जाता है. सार्वजनिक हुए इस पत्र से ईडी से लेकर वित्तमंत्रालय के दोनों अफसरों के बीच मचे घमासान का खुलासा होता है. 
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