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दिल्ली में दम घोंटने वाला प्रदूषण ...

दिल्ली में दम घोंटने वाला प्रदूषण

बारिश का सिलसिला थमने और मौसम के बदलने के साथ दिल्ली में प्रदूषण की समस्या फिर सिर उठाने लगी है. राजधानी में हवा की गुणवत्ता में कमी आने लगी है. हवा की दिशा बदलने से दिल्ली में शुक्रवार को वायु की गुणवत्ता ‘खराब श्रेणी’ में आ गई. अधिकारियों ने बताया कि अब इसने प्रदूषित भारत-गांगेय मैदानी इलाकों से चलना शुरू कर दिया है. इसमें कहा गया कि आनंद विहार, मुंडका, नरेला द्वाराका सेक्टर-आठ, नेहरू नगर और रोहिणी इन सभी में ‘बहुत खराब' वायु गुणवत्ता रही और ये धीरे-धीरे गंभीर प्रदूषण स्तर की ओर बढ़ रहे हैं. शून्य से 50 के बीच एक्यूआई ‘अच्छा' माना जाता है, 50 से 100 के बीच ‘संतोषजनक', 101 से 200 के बीच ‘मध्यम' श्रेणी का, 201 से 300 के बीच ‘खराब', 301 से 400 के बीच ‘बेहद खराब' और 401 से 500 के बीच एक्यूआई ‘गंभीर' माना जाता है. मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ के ताजा रिपोर्ट पर नजर दौड़ाएं तो दिल्ली में प्रदूषण के पांच कारण बताए गये हैं. 

पहला कारण: 

दिल्ली के प्रदूषण में अहम योगदान बाहरी राज्यों से आने वाली करीब 45 लाख गाड़ियों (प्राइवेट कार और ऑल इंडिया टैक्सी, साथ ही बाहर की टैक्सियां ओला-ऊबर भी शामिल हैं) और दिल्ली में जरुरी सामान पहुंचाने वाले ट्रकों का है. चूंकि ज्यादातर गाड़ियां डीजल या पेट्रोल से चलती हैं इसलिए इनका योगदान ज्यादा है. दिल्ली की 1 करोड़ से ज्यादा गाड़ियों के साथ बाहरी राज्यों की गाड़ियों का योगदान 40 फीसदी प्रदूषण दिल्ली में फैलाते हैं. दिल्ली की सड़कों की औसत रफ्तार 30 से 40 किमी प्रति घंटे से घटकर 20 से 22 किमी प्रति घंटा रफ्तार होने से गाड़ियां ज्यादा प्रदूषण फैला रही है. 2010 में 30 फीसदी प्रदूषण गाड़ियों के चलते होता था जो अब बढ़कर 40 फीसदी हो चुका है.

दूसरा कारण: 

दिल्ली के प्रदूषण में दूसरा योगदान दिल्ली में उद्योग और लैंडफिल साइट का है जिनके चलते करीब 23 फीसदी प्रदूषण होता है. इसमें अकेले भलस्वा, गाजीपुर और ओखला के लैंडफिल साइट से निकलने वाले धुंआ, उड़ता कचरा और कचरे से बिजली बनाने वाले कारखाने का योगदान करीब 10 फीसदी है.

तीसरा कारण: 

प्रदूषण का तीसरा कारण दिल्ली की हवा है. जिनके चलते करीब 19 फीसदी प्रदूषण होता है. इसमें दूसरे राज्यों का धूल धुंआ और प्रदूषण शामिल है. दिल्ली की भलस्वा लैंडफिल साइट पर फिर से आग फैल रही है. आसपास के पूरे इलाक़े में वायु-प्रदूषण का ख़तरा बढ़ता जा रहा है. ज़हरीले धुएं की वजह से लोग परेशान हैं. 

चौथा कारण: 

चौथा कारण दिल्ली में चलने वाला कंस्ट्रक्शन, लोगों के जलाने वाले कूड़े, शवदाह, यानि विभिन्न स्रोतों का है. इनसे दिल्ली में करीब 12 फीसदी प्रदूषण होता है. 

पांचवा कारण: 
प्रदूषण का पांचवा कारण दिल्ली के रिहायशी इलाके हैं, जहां रसोई से निकलने वाले धुंए, DG सेट जैसी चीजों से करीब 6 फीसदी प्रदूषण होता है. 2010 में रिहायशी इलाकों से 18 फीसदी प्रदूषण होता है लेकिन कैरोसिन के इस्तेमाल पर पाबंदी और शतप्रतिशत LPG होने से इस प्रदूषण में कमी आयी है.

हाईकार्ट ने कहा, लगता है जैसे 'गैस चैंबर' में रह रहे हैं

दिल्ली उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की कि राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण का वर्तमान स्तर 'चिंताजनक' स्थिति तक पहुंच गया है और यह 'गैस चैंबर में रहने' जैसा है। अदालत ने साथ ही केन्द्र और दिल्ली सरकार को इससे निपटने के लिए विस्तृत कार्य योजनाएं पेश करने का भी निर्देश दिया। न्यायमूर्ति बदर दुरेज अहमद और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने पर्यावरण मंत्रालय और दिल्ली सरकार द्वारा दायर कार्य योजनाओं के बारे में कहा कि ये विस्तृत नहीं हैं, क्योंकि इनमें हर प्राधिकरण की स्पष्ट जिम्मेदारी तथा इन्‍हें करने के लिए समयसीमा नहीं है। पीठ ने उन्हें 21 दिसंबर को सुनवाई की अगली तारीख पर विस्तृत कार्य योजनाएं देने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि दिल्ली में वायु प्रदूषण के दो प्रमुख कारण धूल कण और वाहनों से निकलने वाला धुआं है। अदालत ने केन्द्र तथा दिल्ली सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि पहले कम से कम धूल सुनिश्चित किए बगैर किसी इमारत या सड़क का निर्माण नहीं हो।

अदालत ने दिल्ली सरकार को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्देश के अनुसार, लोगों द्वारा खुले में कूड़ा और पत्तियां नहीं जलाई जाएं। पीठ ने शहर प्रशासन को प्रिंट, ऑडियो और विजुअल मीडिया के जरिए इस तरह के क्रियाकलापों पर प्रतिबंध के बारे में जानकारी देने का निर्देश दिया।
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