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गुरु पूर्णिमा का महत्‍व ...

जीवन के अनंत यात्रा जो पूर्ण करे, जो अध्यात्म से लेकर भौतिक जगत के उचित मार्ग को अलौकिक करे , जो अंधकार से उजाले की ओर ले जाए वह है गुरु जहां आप आकर पूर्ण हो जाते हैं समर्पित हो जाते है जहां आप अपने आप को ढूंढ लेते हैं वह सिर्फ गुरु ही है जो आप को आपसे ही मुलाकात करवाता हैं। 

गुरु शब्द का अर्थ 

" गु " शब्द का अर्थ है अन्धकार अज्ञान और " रु " शब्द का अर्थ है प्रकाश ज्ञान । अज्ञान को नष्ट करनेवाला जो ब्रह्मरूप प्रकाश है वह गुरु है इसमें कोई संशय नहीं । गुरुपूर्णिमा के अवसर पर गुरु दीक्षा लेना अपने आप मे अमृत प्राप्त करने जैसा है। इस अवसर पर माता पिता से लेकर अध्यात्म जगत के गुरु को अभिवादन करें। इतिहास में गुरुदेवों की महिमा रही है की गुरु का हाथ जिसके मस्तक और जीवन पर पड़ा उस शिष्य से वो गुरु को भी गर्व  हुआ, धन्य है ऐसे गुरु। 

हिन्‍दू कैलेंडर के मुताबिक आषाढ़ शुक्‍ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) कहते हैं. इसी दिन महाभारत के रचयिता और चार वेदों के व्‍याख्‍याता महर्षि  कृष्‍ण द्वैपायन व्‍यास यानी कि महर्षि वेद व्‍यास का जन्‍म हुआ था. इसलिए गुरु पूर्णिमा को व्‍यास पूर्णिमा भी कहा जाता है. इस बार गुरु पूर्णिमा 27 जुलाई को है.

गुरु पूर्णिमा का महत्‍व 

इस बार गुरु पूर्णिमा 27 जुलाई को है. गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु की पूजा का विधान है. दरअसल, गुरु की पूजा इसलिए भी जरूरी है क्‍योंकि उसकी कृपा से व्‍यक्ति कुछ भी हासिल कर सकता है. गुरु की महिमा अपरंपार है. गुरु के बिना ज्ञान की प्राप्‍ति नहीं हो सकती. गुरु को तो भगवान से भी ऊपर दर्जा दिया गया है. इस दिन गुरु की पूजा की जाती है. पुराने समय में गुरुकुल में रहने वाले विद्यार्थी गुरु पूर्णिमा के दिन विशेष रूप से अपने गुरु की पूजा-अर्चना करते थे. गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु में आती है. इस मौसम को काफी अच्‍छा माना जाता है. इस दौरान न ज्‍यादा सर्दी होती है और न ही ज्‍यादा गर्मी. इस मौसम को अध्‍ययन के लिए उपयुक्‍त माना गया है. यही वजह है कि गुरु पूर्णिमा से लेकर अगले चार महीनों तक साधु-संत विचार-विमर्श करते हुए ज्ञान की बातें करते हैं. 

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